टर्नमूल कांग्रेस की युवावादी उम्मीदवारी सायोनी पर राजनैतिक विवाद चरम तक पहुँचा

सायोनी घोष को टिम्सी का बागी सांसद घोषित किया

टर्नमूल कांग्रेस की युवावादी उम्मीदवारी सायोनी पर राजनैतिक विवाद चरम तक पहुँचा

सायोनी घोष ने पहले नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ तीखे शब्दों में आवाज उठाई थी, अब उनका नाम टर्नमूल कांग्रेस के 19 सांसदों द्वारा मंत्रिमंडलीय पदों का खुलासा कर दिया गया है। टर्मिनल उम्मीदवार के रूप में पेश करने के बावजूद 2024 लोकसभा चुनाव हारने के बाद उनका राजनीतिक दायित्व और आक्रामक प्रतिबद्धता पर विवाद खत्म नहीं हुई

टर्नमूल कांग्रेस की युवावादी उम्मीदवारी सायोनी पर राजनैतिक विवाद चरम तक पहुँचा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी नाम की हो रही है तो वह सायोनी घोष हैं। कभी ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सबसे मुखर युवा आवाज मानी जाने वाली सायोनी का नाम अब पार्टी के कथित बागी सांसदों की सूची में सामने आया है। दिलचस्प बात यह है कि यही सायोनी कुछ महीने पहले तक बीजेपी और नरेंद्र मोदी सरकार पर सबसे तीखे हमले बोलने वाले नेताओं में गिनी जाती थीं।

राजनीति में समय कितनी तेजी से करवट लेता है, इसका ताजा उदाहरण सायोनी घोष का मामला बन गया है। जिस नेता ने सार्वजनिक मंचों से टीएमसी के प्रति अपनी निष्ठा जताई, ममता बनर्जी को संघर्ष का प्रतीक बताया और बीजेपी पर लगातार हमले किए, उसी का नाम अब लोकसभा अध्यक्ष को भेजी गई उस चिट्ठी में बताया जा रहा है, जिसमें टीएमसी के 19 सांसदों ने अलग समूह के रूप में मान्यता मांगी है।

टीएमसी की आक्रामक प्रवक्ता से बागी सांसदों की कतार तक

33 वर्षीय सायोनी घोष बंगाली फिल्म और वेब सीरीज की दुनिया का चर्चित चेहरा रही हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने राजनीति में कदम रखा और टीएमसी में शामिल हुईं। उस चुनाव में उन्हें बीजेपी की अग्निमित्रा पॉल के खिलाफ मैदान में उतारा गया था, लेकिन जीत नहीं मिली। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा बनाए रखा। 2024 के लोकसभा चुनाव में जादवपुर सीट से टिकट मिला और सायोनी संसद पहुंच गईं। इसके बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में टीएमसी की सबसे तेजतर्रार युवा सांसदों में शुमार होने लगीं। लोकसभा के भीतर और बाहर सरकार पर उनके हमले अक्सर सुर्खियां बनते थे। टीवी डिबेट्स से लेकर सोशल मीडिया तक, सायोनी की पहचान एक आक्रामक विपक्षी नेता की बन चुकी थी।

'सायोनी चड्ढा नहीं है' वाला बयान फिर चर्चा में

सायोनी घोष का एक पुराना बयान अब सोशल मीडिया पर फिर वायरल हो रहा है। जब आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं के भाजपा में जाने को लेकर बहस छिड़ी थी, तब सायोनी ने कहा था कि "सायोनी घोष है ना, वो चड्ढा नहीं है, इसलिए वो चड्ढा-चड्ढी नहीं होगा कभी।' उस समय उन्होंने दावा किया था कि बीजेपी के पास एजेंसियां, संसाधन और धनबल हो सकता है, लेकिन टीएमसी के पास ममता बनर्जी जैसी नेता हैं। यही वजह है कि अब जब उनका नाम कथित बागी सांसदों की सूची में सामने आया है तो उनके पुराने बयान भी नए सिरे से चर्चा में आ गए हैं।

चुनावी हार के बाद भी ममता के साथ खड़ी दिख रही थीं सायोनी

लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद भी सायोनी घोष लगातार पार्टी लाइन पर बोलती नजर आ रही थीं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। ममता बनर्जी के आवास पर हुई बैठक के बाद उन्होंने कहा था कि टीएमसी चुनाव नहीं हारी है, बल्कि जनादेश की चोरी हुई है। उन्होंने दावा किया था कि जनता आने वाले चुनावों में इसका जवाब देगी। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद को ममता बनर्जी का समर्पित कार्यकर्ता बताते हुए पार्टी के संघर्ष को और तेज करने की बात भी कही थी। इसी वजह से उनके नाम का बागी सांसदों में सामने आना कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों को भी हैरान कर रहा है।

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